Add To collaction

लेखनी प्रतियोगिता -09-Feb-2023 गुमनाम खत का कमाल



                               गुमनाम खत का कमाल
                              *********************

                     कविता डोरवैल की आवाज सुनकर बाहर आई तब उसने दरवाजे पर पोस्ट मैंन को एक छोटा सा पार्सल लिए खडा़ पाया। कविता कुछ बोलती उससे पहले पोस्ट मैन ने ही पूछ लिया," इस एड्रैस के नाम का पार्सल  है। नाम किसी का नही लिखा है "

     "बिना नाम का पार्सल?  यह पार्सल कहाँ से आया है?" कविता ने पोस्टमैन से पूछा।

    "यह पार्सल किसी  ने सूरत से भेजा है?  उन्होंने भी अपना नाम नहीं लिखा केवल उनका भी पता लिखा है। " 

     यह  सुनकर कविता सोचने लगी कि मैं  सूरत में किसी को नहीं जानती हूँ । मै कभी सूरत भी नही गयी और न मेरा कोई सगा सम्बन्धी सूरत रहता है। 

        "मैडम क्या सोच रही हो ? आप यहाँ अपने हस्ताक्षर करो और अपना पार्सल सम्भालो। सोचना समझना बाद में। मुझे और भी काम है। " इतना कहते हुए उसने एक पेपर उसके सामने कर दिया।

        कविता ने बिना कुछ देखे अपने हस्ताक्षर कर दिए और काँपते हाथौ से पार्सल पकड़ लिया। पोस्टमैन के जाने के बाद कविता ने जब वह पार्सल खोला तब वह हैरान रह गयी।

     क्यौकि उस पार्सल में जो फोटोग्राफ निकला उसे देखकर उसे ऐसा लगा कि जैसे उसके पुराने घावौ पर किसीने नमक छिड़क दिया हो। वह फोटोग्राफ उसका और कपिल का था।

     कपिल उसका कालेज का दोस्त था। उसने कपिल के साथ प्यार की कसमें खाई थी। दोनो ने शादी करने का फैसला भी कर लिया था क्यौकि कविता कपिल के बच्चे की माँ बनने वाली जो होगयी थी।

       परन्तु वक्त कब अपना करवट बदलले इसका किसी को नही मालूम। वक्त एक पल मे करोड़पति को रोडपति व गरीब को अरब पति बनादे।

          ऐसा ही कुछ कविता के साथ हुआ था। कपिल किसी काम से दिल्ली गया हुआ था। रास्ते में उसकी बस एक नदी में गिर गयी।  उस बस में से कुछ लोगौ की मौके पर ही मृत्यु होगयी और कुछ पानी के साथ बहगये। उस बस में से कोई नही बचा ।

       जब यह दुःखदभरा  समाचार   कविता ने सुना तब उसका तो सबकुछ लुट गया। वह कहीं की नहीं रही। जब कविता के मम्मी पापा को कविता का कपिल की माँ बनने का समाचार मिला तब उनका भी बुरा हाल था। उन्होंने उस बच्चे को गिरवाने की सलाह दी लेकिन कविता इसके लिए कभी भी तैयार नही थी। और कविता को यह विश्वास ही नही आरहा था कि कपिर उसे छोड़कर जा सकता है।

                        जब यह समाचार कपिल के दोस्त  विवेक को मालूम हुआ तब उसने कविता को अपनाने केलिए कहा  ।पहले तो कविता इसके लिए तैयार नही होरही थी परन्तु बच्चे को कोई हरामी न कहे इसलिए उसने  विवेक के साथ एक समझौता किया जिसके अन्तर्गत यह तय हुआ कि वह विवेक की पत्नी तो बनेगी लेकिन उन दोनौ के बीच  पति पत्नी के सम्बन्ध नही होगे।

             विवेक इसके लिए भी तैयार होगया और कविता ने विवेक से शादी तो करली लेकिन उसने उसके साथ  कभी भी पति पत्नी के सम्बन्ध नही बनाये। विवेक ने भी इसके लिए कभी जोर जबरजस्ती नही कीं।

           उधर कपिल नदी में बहता हुआ एक शहर में पहुँचा। वहाँ लोगौ ने उसे निकालकर अस्पताल में भर्ती करवादिया। कपिल की याद दास्त चलीगयी थी। दो तीन वर्ष बाद जब उसकी एक हादसे में याददास्त वापिस आई तब वह कविता के विषय में जानकारी लेने अपने घर  गया तब उसे मालूम हुआ कि उसके दोस्त विवेक ने उससे शादी करली और मुम्बई चलागया।

         कपिल मुम्बई उन दोनों को खोजते हुए गया था परन्तु उसने उनकी जिन्दगी से दूर रहना ही सही लगा क्यौकि वह जानता था कि कविता ने किसी मजबूरी में ही यह रिश्ता किया होगा।

       इसके बाद कपिल सूरत में किसी कम्पनी में जाब करने लगा।  कपिल इस समय डायरी लिखने लगा उसने अपनी डायरी में अपनी पिछली पूरी जिन्दगी का हाल लिखा था। उस डायरी में उसने कविता का नया पता भी लिखा था। यह पता कपिल को अपने एक दोस्त से मिला था उसी समय वह कविता से मिलने भी मुम्बई गया था। परन्तु वह उससे बिना मिले ही वापिस लौट आया था।

        एक दिन कपिल को सूरत में  हार्ट अटैक आगया । जिस मकान में किराये पर रहता थी उस मकान मालिक ने ही कपिल को अस्पताल में भर्ती करारा था। उसी समय मकान मालिक की पत्नी नीरू ने उसके किसी रिश्तेदार के विषय में जानने हेतु उसके कमरे मे खोजबीन की तब उसकी डायरी मिली थी।उसके साथ एक फोटोग्राफ भी मिला था।

       डायरी पढ़कर   नीरू ने ही कविता को खत लिखा और फोटोग्राफ भी भेजा था।

        कविता उस खत को पढ़कर तुरन्त ही विवेक के साथ अपने बूटे अमन के साथ सूरत केलिए चलदी और वहाँ उस पते पर पहुँचकर वह नीरू नाम की औरत से मिली और उसके साथ ही  अस्पताल पहुँची।

        जब कपिल को होश आया तब अपने सामने विवेक व कविता को देखकर  वह कुछ कहना चाहता था परन्तु उससे पहले विवेक ही बोला," कपिल मेरे दोस्त यह कविता आज भी  गंगा की तरह पवित्र है इसे गलत मत समझना। मैने केवल तुम्हारे बच्चे के लिए यह शादी की थी जिससे उसे कोई हरामी न कहे। कविता की जिद थी कि वह इस बच्चे को जन्म देगी। तब मैने ही यह सब करने को कहा था। अब तुम अपनी अमानत को सम्भालो। " इतना कहकर विवेक ने  कविता और अमन को उसको सौप दिया। और वह जाने लगा।

            " मुझे माँफ करना मेरे दोस्त ! मैने तुम्हें व कविता को गलत समझा इसके लिए छमा चाहता हूँ तुम मुझे इसतरह अकेला छोड़कर नहीं जा सकते हो।" और उसने विवेक को अपने गले लगा लिया।

      इस तरह एक बिछडा़ हुआ परिवार आज पुनः मिल गया और वह नीरू को इसके लिए धन्यवाद करने लगे।क्यौकि यह सब नीरू के  बेनाम खत का कमाल था।

 
आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।

नरेश शर्मा  " पचोरी"

          

   12
10 Comments

Mahendra Bhatt

12-Feb-2023 12:45 PM

शानदार

Reply

Babita patel

11-Feb-2023 09:28 PM

nice

Reply

sunanda

11-Feb-2023 06:10 PM

very nice story

Reply